- महाशिवरात्रि से पहले महाकाल दरबार में अंतरराष्ट्रीय पुष्प सज्जा की शुरुआत: 40 से अधिक विदेशी फूलों से सजेगा परिसर; बेंगलुरु से आए 200+ कलाकार तैयारियों में जुटे
- उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में तड़के विशेष पूजा-विधि: स्वस्ति वाचन के साथ खुले पट, राजा स्वरूप में सजा दरबार
- महाशिवरात्रि से पहले उज्जैन में हाई अलर्ट: देवास गेट से रेलवे स्टेशन तक संयुक्त सर्च ऑपरेशन, 100 पुलिसकर्मी पांच टीमों में तैनात
- महाशिवरात्रि पर महाकाल दर्शन के लिए डिजिटल कंट्रोल रूम, गूगल मैप से तय होगा आपका रास्ता: जाम लगते ही मैप से गायब होगा रूट, खाली पार्किंग की ओर मोड़ दिया जाएगा ट्रैफिक
- महाकाल मंदिर में अलसुबह भस्मारती की परंपरा, वीरभद्र के स्वस्तिवाचन के बाद खुले चांदी के पट; पंचामृत अभिषेक और राजा स्वरूप में हुआ दिव्य श्रृंगार
उज्जैन में 15 नवंबर से गधों का मेला:5 दिन पहले ही आ गए गधे, दूर-दराज से आएंगे खरीदने-बेचने वाले
उज्जैन के कार्तिक मेला ग्राउंड पर हर साल लगने वाला गधों का मेला इस बार भी लगेगा। मेला 15 नवंबर से शुरू होगा, लेकिन गधे और उनके सौदागरों ने चार दिन पहले ही उज्जैन में डेरा जमा लिया है। मेले में जीरापुर, शाजापुर, मक्सी, सुसनेर, सारंगपुर, भोपाल, राजस्थान, महाराष्ट्र सहित अन्य जगहों से व्यापारी मेले में पहुंचेंगे।
उज्जैन में शिप्रा नदी के किनारे बड़नगर रोड पर कार्तिक मेला ग्राउंड में लगने वाले यह मेला हर साल देवउठनी ग्यारस से कार्तिक पूर्णिमा तक लगता है, लेकिन यह मेला पिछले साल नहीं लगा था। इस वजह से इस बार गधों का सौदा करने वाले यहां 4 दिन पहले ही पहुंच गए। पहले दिन 70 गधे बिकने के लिए आए।
उज्जैन में इस बार गधों का मेला 15 से 20 नवंबर तक लगेगा। लेकिन इससे पहले ही कई व्यापारी अपने-अपने गधे बेचने के लिए शहर में आ चुके हैं। अब इनके खरीदार भी पहुंचने लगे हैं। हर साल प्रदेश भर के व्यापारी उज्जैन के मेले में गधों की बिक्री खरीदी करने के लिए आते हैं। व्यापारी कमल प्रजापत ने बताया कि ग्यारस से मेले की शुरुआत होगी। अभी 70 से अधिक गधे, शाजापुर, सुसनेर, राजस्थान, महाराष्ट्र, जीरापुर से बिकने के लिए आ चुके हैं। हालांकि दो वर्षों से मेले में रौनक नहीं है।
5 से 30 हजार रुपए में बिकते हैं गधे
मेले में गधों की कीमत यहां 5 हजार से 30 हजार रुपये के बीच तय होती है। गधों के इस मेले में कई बड़े और छोटे खरीदार आते हैं। उज्जैन के पास साहेब खेड़ी से आए किसान सोमेश्वर ने कहा कि कोरोना के कारण बीते दो वर्षों से जानवरों की संख्या में कमी आई है।